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सोन तट सकोला सिद्ध बाबा पहाड़ी शोक में डूबी: श्री राम जानकी मंदिर के संस्थापक संत गुरु चरण दास का निधन

गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के पेंड्रा विकासखंड के सोनमूंड़ा से निकलने वाला सोन नदी पेंड्रा एवं मरवाही विकासखंड को बीचो-बीच दो भागों में विभाजित करताहै। सोनभद्र अर्थात सोन नदी अपने उद्गम सोनमूंड़ा से निकलकर छत्तीसगढ़ में लगभग 50 किलोमीटर बहा है। सोन के बहाव वाले इस अंचल को सोनाचल क्षेत्र कहते हैं और यह क्षेत्र गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में आता है। गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में सोन की खासियत यह है कि या यहां की भूमि को सिंचित और हरा भरा करता हुआ बढ़ता है। सोन के बहाव वाले इस रास्ते में उसके तट पर अनेक प्रसिद्ध पावन सिद्ध तीर्थ है।सोनमुंंड़ा से निकलकर उत्तर दिशा में बहते हुए घाघरा,हर्राडीह , नवापारा की सीमा से होता हुआ ग्राम गांजन एवं पड़रिया के बीच से कंचनडीह से आगे सकोला एवं भाड़ी गांव की सीमा को छूता हुआ आगे बढ़ता है। यहीं पर ग्राम पेंड्रा कोटमी मुख्य मार्ग पर ग्राम सकोला के किनारे सिद्ध बाबा की पहाड़ी के नीचे जहां पर सिंचाई विभाग ने अपर सोन डायवर्सन नाम की सिंचाई परियोजना स्वीकृत करते हुए एक लघु बांध का निर्माण किया है।  सोन नदी पर बने इसी बांध से सटे सिद्ध बाबा की पहाड़ी में बने मंदिरों के नव निर्माण तथा नीचे सोन नदी के किनारे पुराने मंदिरों की उपस्थिति से यह स्थान अत्यंत रमणीक बन गया है जिसका पूर्ण श्रेय ब्रह्मलीन संत गुरचरण दास जी को जाता है। लंबे समय से सकोला कोटमी क्षेत्र में पदार्थ रहने के कारण इस सिद्ध बाबा पहाड़ी से मेरी आस्था वर्षों से जुड़ी हुई है और समय मिलने पर स्कूल आते जाते मैं इस स्थान पर माथा टेकने अवश्य जाता रहा। यही आते जाते मेरा परिचय संत गुरु चरण दास जी से हुआ था। संत गुरु चरण दास जी अपने सिद्धांत के पक्के, धर्म अनुरागी, सीधी सपाट सच्ची बात कहने वाले संत थे। सिद्ध बाबा पहाड़ी में वर्ष 1994 में प्रसिद्ध संत त्यागी जी महाराज ने यज्ञ किया था। कालांतर में वर्ष 2000 के आसपास महंत गुरु चरण दास जी ने अपनी त्याग और तपस्या के बल पर यहां पर मंदिर समूह के नव निर्माण कराएं। इन मंदिरों में प्रमुख श्री राम जानकी लक्ष्मण दरबार है तथा इसके बाय श्री लक्ष्मी नारायण विराजमान है जबकि अदाएं में श्री द्वारिकाधीश एवं रुकमणी जी विराजी हुई है। इसके अलावा सिद्ध बाबा की पहाड़ी में ही श्री राधा कृष्ण मंदिर श्री अंबाजी का मंदिर शोभायमान है जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पहाड़ी में दक्षिण मुखी हनुमान जी विराजमान है। महंत गुरु चरण दास जी इन मंदिरों के अलावा वहां पर एक धर्मशाला का निर्माण भी कराया हैं। ब्रह्मलीन संत गुरु चरण दास जी की प्रबल इच्छा रही थी कि सिद्ध बाबा की पहाड़ी में संस्कृत विद्यालय के साथ संगीत विद्यालय संचालित हो तथा इसके साथ वे वहां वृद्ध तथा विधवा आश्रम भी संचालित करना चाहते थे तथा इसके लिए प्रयास रत रहते थे। लगभग 93 साल की उम्र को छू रहे महंत गुरु चरण दास की भक्ति एवं तपस्या का कोई पारावार नहीं रहा। मध्य प्रदेश के अमरपाटन जिले के ग्राम पड़हा के प्रख्यात विद्वान पंडित रामपबकस शुक्ल की इकलौती संतान पंडित राम खेलावन शुक्ला का जन्म 18 नवंबर सन 1933 में हुआ था।45 वर्ष की उम्र में गृहस्थ जीवन का परित्याग कर श्री चित्रकूट निर्मोही अखाड़ा राघव प्रयाग चित्रकूट के स्वामी श्री रामाश्रयदास से दीक्षा प्राप्त कर महंत गुरु चरण दास के नाम से जाने जाने लगे । पिता की 600 एकड़ भूमि के एकमात्र वारिस होने के बावजूद इन्हें बचपन से ही भक्ति रास आती थी। वर्ष 1947 में मिडिल स्कूल पास कर 1949 में वह शिक्षक बन गए तथा वर्ष 1951 में वेंकट संस्कृत विद्यालय रीवा से संस्कृत की मध्यमा उत्तीर्ण की।65 वर्ष में यहां पधारे तथा इस सिद्ध बाबा की पहाड़ी में नव निर्माण किया तथा सनातन धर्म की ध्वजा फहराए हुए थे जो हमेशा फहरी रहेगी। यहां सोन तत्पर प्रतिवर्ष परंपरागत रूप से बसंत पंचमी को दो दिवसीय मेला का आयोजन होता है। महंत गुरु चरण दास प्रतिवर्ष माघ महीने में यहां भागवत एवं राम कथा क् अनुसार परं श्री सिद्ध बाबा पहाड़ी के नीचे जहां पर सोन नदी बहती है उसके पूर्व तट पर भीम मंदिरों के समूह है जिनमें से प्रमुख श्री हनुमान जी का मंदिर ,श्री सोनेश्वर महादेव जी का मंदिर ,श्री शनिदेव जी महाराज का मंदिर, मुख्य मार्ग में स्थित है जबकि सोन नदी केपश्चिम तट पर ही जोगी बाबा नामक स्थान है। सोनांचल में भक्ति की अलख जागने वाले संत गुरु चरण दास जी का 1 मार्च 2026 दोपहर 1:15 पर निधन हो गया आज 2 मार्च को उन्हें सिद्ध बाबा पहाड़ी पर ही समाधि दी जाएगी। कर्मठ एवं भक्ति भावना से और ओत-प्रोत ब्रह्मलीन संत गुरु चरण दास जी महाराज द्वारा जो मार्ग बताया गया है उसमें निरंतर चलते रहने का प्रयास रहेगा। 

जय सदगुरुदेव हर हर नर्मदे

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